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time:2021-10-21 22:14:01 इंटरनेशनल फंड के बारे में जानिए अपने हर सवाल का जवाब Views:4591

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टैक्स के लिहाज से इंटरनेशनल फंड को वही दर्जा हासिल है, जो डेट म्यूचुअल फंड का है. इस फंड में तीन साल से कम समय तक निवेश बनाए रखने पर निवेशक को इसके मुनाफे पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स देना पड़ता है.
पिछले कुछ समय से इंटरनेशनल फंड की बहुत चर्चा हो रही है. इसकी वजह इन फंडों में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी है. हालांकि, अब भी निवेशकों को ऐसे फंड़ों के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है. इंटरनेशनल फंड का मतलब क्या है? क्या इन फंडों में निवेश का क्या फायदा है? क्या आपको इस फंड में निवेश करना चाहिए? आइए इन सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

इंटरनेशनल फंड में आपको क्यों निवेश करना चाहिए?
जोखिम घटाने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंडों के पोर्टोफोलियो का डायवर्सिफिकेशन जरूरी है. डायवर्सिफिकेशन का मतलब अलग-अलग तरह के फंडों में निवेश है. कई बार भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता है, जबकि विदेशी बाजार का प्रदर्शन अच्छा होता है. दुनिया के कई बाजारों का भारत से ज्यादा संबंध नहीं है. ऐसे में इंटरनेशनल फंड में निवेश से डायवर्सिफिकेशन में मदद मिलती है. इससे आपका जोखिम घट जाता है.

निवेशकों के लिए इंटरनेशनल फंड में निवेश के लिए कौन-कौन से विकल्प हैं?
आज भारतीय निवेशकों के लिए इंटरनेशनल फंड के कई विकल्प हैं. ये देश, क्षेत्र, थीम और टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं. कोई भारतीय निवेशक रुपये में इन इंटरनेशनल फंडों में निवेश कर सकता है. आप सामान्य म्यूचुअल फंड की तरह इंटरनेशनल फंड का चुनाव कर उसमें ऑनलाइन या ऑफलाइन निवेश कर सकते हैं.

इंटरनेशनल फंड किस तरह विदेशी शेयरों में निवेश करते हैं?
भारतीय बाजार में मौजूद इंटरनेशनल फंड सीधे विदेशी कंपनियों के शेयरों में या विदेश के दूसरे फंडों में निवेश करते हैं. दूसरे फंडों में निवेश को फीडर रूट कहा जाता है. यह एक तरह से फंड ऑफ फंड की तरह है.

यह भी पढ़ें : एनपीएस में निवेश की उम्र सीमा बढ़कर हो सकती है 70 साल!

इंटरनेशनल फंडों के रिटर्न पर किस तरह टैक्स लगता है?
टैक्स के लिहाज से इंटरनेशनल फंड को वही दर्जा हासिल है, जो डेट म्यूचुअल फंड का है. इस फंड में तीन साल से कम समय तक निवेश बनाए रखने पर निवेशक को इसके मुनाफे पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स देना पड़ता है. टैक्स की दर निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार होती है. तीन साल से ज्यादा वक्त तक फंड में निवेश बनाए रखने पर निवेशक को इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है. इसकी वजह यह है कि इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस माना जाता है. इंडेक्सेशन के बाद टैक्स की दर 20 फीसदी होती है.

क्या इंटरनेशनल फंड में निवेश करने में बहुत जोखिम है?
शेयरों में निवेश से जुड़े जोखिम के अलावा ऐसे फंड में निवेश से करेंसी का जोखिम भी जुड़ा होता है. दूसरे देश की मुद्रा के मुकाबले रुपये में कमजोरी और मजबूती का असर आपके रिटर्न पर पड़ता है. भारत में निवेशक रुपये में निवेश करता है. लेकिन, म्यूचुअल फंड कंपनी को उस देश की मुद्रा में इंटरनेशनल फंड में निवेश करना पड़ता है, जहां का वह फंड होता है. इसलिए इंटरनेशनल फंड में निवेश करने से पहले आपको करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम के लिए तैयार रहना होगा.

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