स्लॉट आप असली पैसे के लिए खेल सकते हैं

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time:2021-10-25 19:15:27 क्‍या आपको फंड ऑफ फंड्स में निवेश करना चाहिए? Views:4591

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हाल में कई फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) लॉन्‍च हुए हैं. इस तरह निवेशकों के पास चुनने के लिए विकल्पों की कमी नहीं है.
हाल में कई फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) लॉन्‍च हुए हैं. इस तरह निवेशकों के पास चुनने के लिए विकल्पों की कमी नहीं है. हालांकि, एक बात हर निवेशक को ध्‍यान रखने की जरूरत है. चूंकि एफओएफ दूसरी म्‍यूचुअल फंड स्‍कीमों में निवेश करते हैं. लिहाजा, डुप्‍लीकेशन की कॉस्‍ट आ सकती है. इसका मतलब है कि निवेशकों को ओरिजनल स्‍कीम के साथ ही एफओएफ के एक्सपेंस रेशियो का भार भी उठाना पड़ सकता है.

इस बात को उदाहरण से समझते हैं. मान लेते कि निवेशक हाल में लॉन्‍च निप्‍पॉन इंडिया एसेट अलोकेट एफओएफ में निवेश करते हैं. इस मामले में उन्‍हें एफओएफ का एक्‍सपेंस रेशियो 0.19 फीसदी उठाना पड़ेगा. साथ ही वह एफओएफ जिन स्‍कीमों में निवेश करेगा, उनके वेटेड एवरेज एक्‍सपेंस रेशियो का भार भी निवेशकों पर आएगा. इस मामले में तीन स्‍कीमें हैं, निप्‍पॉन इंडिया स्‍मॉलकैप फंड (1.06%), निप्पॉन इंडिया ग्रोथ फंड (1.26%) और निप्पॉन इंडिया लॉर्जकैप फंड (1.18%).

आपको एफओएफ रूट का इस्‍तेमाल सिर्फ तभी करना चाहिए अगर अतिरिक्‍त कॉस्‍ट उचित है. आइए, जानते हैं कि इस फैसले तक पहुंचने में आपको किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए.

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आपके रिटर्न प्रोफाइल में फिट हो स्‍कीम
प्राइमरी स्‍कीम यानी घरेलू म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम का उपलब्‍ध न होना एफओएफ रूट लेने का एक कारण हो सकता है. इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इस नई स्‍कीम को आपके पोर्टफोलियो प्रोफाइल में फिट होना चाहिए.

क्रेडेरे वेल्‍थ पार्टनर्स में प्रोडक्‍ट और रिसर्च के हेड अरुण गोपालन कहते हैं, ''निवेशकों को जिस स्‍कीम में निवेश किया जा रहा है, उसे देखना चाहिए. साथ ही यह भी पता लगाना चाहिए कि उससे क्‍या मकसद हल हो रहा है.''

एलआरएस के जरिये सीधे निवेश करने में क्‍या दिक्‍कत है?
आप पूछ सकते हैं कि लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्‍कीम (एलआरएस) का इस्तेमाल करते हुए सीधे विदेशी शेयरों में क्‍यों निवेश नहीं किया जा सकता है. यह बिल्‍कुल सही है कि आप सीधे निवेश कर सकते हैं. लेकिन, उसके लिए आपको काफी विशेषज्ञता की जरूरत होगी. इस बात को ध्‍यान रखना चाहिए कि भारतीय फंड हाउस सीधे इंटरनेशनल सेगमेंट में सिर्फ इसलिए नहीं हाथ आजमा रहे हैं क्योंकि उनके पास यहां निवेश करने की कुशलता नहीं है.

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आप इंटरनेशनल फंडों या एक्‍सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश कर काफी हद तक विशेषज्ञता के मसले को हल कर सकते हैं. हालांकि, यह एक और परेशानी खड़ी करेगा. वह है एलआरएस व्यवस्था के तहत रिपोर्ट‍िंग की.

हाल में लॉन्‍च हुए एफओएफ
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जहां एफओएफ रूट का इस्‍तेमाल ग्‍लोबल डायवर्सिफिकेशन के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है. वहीं, अच्‍छा होगा कि घरेलू थीम के लिए इससे बचा जाए.

घरेलू एफओएफ की उपयोगिता कम
बात जब घरेलू परिदृश्य की आती है तो एफओएफ की उपयोगिता घट जाती है. हाल में लॉन्‍च कई एफओएफ अपने ही ईटीएफ में पैसा लगाएंगे. इस मामले में वैल्यू एडिशन कम है. कारण है कि निवेशक सेकेंडरी मार्केट से प्राइमरी ईटीएफ सीधे खरीद सकते हैं. हालांकि, यह निवेशकों के एक धड़े के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

प्‍लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के सीईओ विशाल धवन कहते हैं कि जिन म्‍यूचुअल फंड निवेशकों के पास डीमैट या ट्रेडिंग अकाउंट नहीं है, उनके लिए ईटीएफ में एफओएफ निवेश उपयोगी होगा.

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नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनी कोलगेट पामोलिव इंडिया लि. का सितंबर में समाप्त चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही का शुद्ध लाभ 1.83 प्रतिशत घटकर 269.17 करोड़ रुपये रह गया। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 274.19 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। शेयर बाजार को भेजी सूचना में कंपनी ने कहा कि तिमाही के दौरान उसकी परिचालन आय 5.19 प्रतिशत बढ़कर 1,343.96 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,277.66 करोड़ रुपये रही थी। कोलगेट पामोलिव केफ्रैंकलिन टेंपलटन म्यूचुअल फंड ने शुक्रवार को कहा कि उसकी छह योजनाओं को अप्रैल 2020 में बंद होने के बाद से 15,776 करोड़ रुपये मिले हैं.मनी मार्केट म्यूचुअल फंडों के बारे में ये 5 बातें जान लें, होगा फायदा

जेएसडब्ल्यू स्टील के सज्जन जिंदल को गृह मंत्री अमित शाह ने जमीन आवंटन के पेपर सौंप दिए हैं। सज्जन जिंदल जेएसडब्ल्यू ग्रुप के सीएमडी और वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन के चेयरमैन हैं।नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने सोमवार को कहा कि भारत दूसरे देशों को कोविड-19 वैक्सीन की आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके इस साल के अंत तक शुरू होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि साल के अंत तक पर्याप्त उत्पादन न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि निर्यात के लिए अतिरिक्त उत्पादन भी होने लगेगा। अधिकारी ने हालांकि कहा कि दूसरे देशों को वैक्सीन की आपूर्ति का अपने देश के टीकाकरण कार्यक्रम के साथ तालमेल बैठाना होगा। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘दूसरे देशों को वैक्सीन उपलब्ध करानेपोर्टर ने टाइगर ग्लोबल, विट्रूवियन, अन्य से 750 करोड़ रुपये जुटाए

समय गुजरने के साथ उन्‍हें इक्विटी में निवेश कम कर देना चाहिए. इसके बजाय धीरे-धीरे डेट फंडों की ओर रुख करना चाहिए.नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने सोमवार को कहा कि भारत दूसरे देशों को कोविड-19 वैक्सीन की आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके इस साल के अंत तक शुरू होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि साल के अंत तक पर्याप्त उत्पादन न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि निर्यात के लिए अतिरिक्त उत्पादन भी होने लगेगा। अधिकारी ने हालांकि कहा कि दूसरे देशों को वैक्सीन की आपूर्ति का अपने देश के टीकाकरण कार्यक्रम के साथ तालमेल बैठाना होगा। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘दूसरे देशों को वैक्सीन उपलब्ध करानेक्‍या आपको फंड ऑफ फंड्स में निवेश करना चाहिए?

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